डेजी की डायरी
पहला दिन आज सुबह सो कर उठे तो तेज बारिश हो रही थी बाहर आकर देखा तो सड़क पर पानी ही पानी था कुछ लोग जाता लगाए कुछ बरसाती वह तो कुछ यूं ही देखते हुए सड़क पर आ जा रहे थे अरे आज मैं स्कूल कैसे जाऊंगी मैंने सोचा वहां भी तो पानी ही पानी भरा होगा तब तक मैं आ गई उन्होंने बताया कि स्कूल में आज छुट्टी हो गई है टीचर दीदी का फोन आया था तब क्या किया जाए मैंने सोचा बारिश में बाहर भी तो नहीं निकल सकते मैंने भैया को बुलाया और एक प्लान बनाया मैया ने बनाई कागज की नाव तो मैंने बनाया बारिश का चित्र भैया ने आंगन में जाकर तेरा ही नाम मैंने कमरे में लगा दिया बारिश का चित्र तुम्हारे चित्र में मेरी नाम तो है ही नहीं भैया बोला चित्र में एक नाव थी लेकिन अब वह आगे चली गई है । दूसरा दिन आज मेरी सबसे प्यारी दोस्त गुलनाज का जन्मदिन है उसने मुझे फोन पर मैसेज भेजा और जरूर आने को कहा है मैं बहुत खुश हूं मैंने उसके लिए एक बहुत प्यारा ग्रीटिंग कार्ड बनाया है वह देखेगी तो बहुत खुश होगी। तीसरा दिन ...




